आज़मगढ़। बरदह थाना के पुलिस अधिकारियों ने एक अंतर‑जनपदीय गिरोह को उजागर किया जो शादी के नाम पर लोगों को ठगा रहा था। शुक्रवार को इस गिरोह के सात सदस्य, जिनमें दो महिलाएँ भी शामिल हैं, को हिरासत में ले लिया गया। उनकी तिजोरी से 19,650 रुपये, विविध सोने‑चांदी के आभूषण, कपड़े, मोबाइल फ़ोन और दो मोटरसाइकिलें बरामद हुईं।
घटना की पृष्ठभूमि
अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण चिराग जैन के अनुसार, इस समूह ने इच्छुक दुल्हन‑दुल्हे को लक्ष्य बनाया। महिला सदस्य को दुल्हन बनाकर उसकी तस्वीर दिखाते, फिर शादी तय होने पर अन्य सदस्य दुल्हन के पिता, भाई या रिश्तेदार के रूप में समारोह में शामिल होते।
“शादी के दौरान दुल्हन को दिया गया नकद और आभूषण लेकर हम लड़के पक्ष को झूठे मुकदमे और विवाद में फँसाने की धमकी देते थे, फिर सब सामान बांट कर फरार हो जाते थे,” पुलिस ने बताया।
शिकायत की शुरुआत
मामला तब उजागर हुआ जब हरदोई के बिलग्राम थाना क्षेत्र के निवासी रामबिलाश ने 9 सितंबर को बरदह थाने में शिकायत दर्ज करवाई। उन्होंने बताया कि उनके बेटे राजकुमार को व्हाट्सएप पर एक लड़की की फोटो भेजी गई, जिससे उन्होंने बंधवा महादेव मंदिर में शादी करवाई। समारोह के दौरान लड़की को नाक की कील तथा 80 हजार रुपये दिए गए।
शादी के बाद राजकुमार को बंधवा मोड़ पर गिरोह के सदस्य ने गाड़ी से उतारा, लड़की और नकदी लेकर भाग निकले। यह शिकायत पुलिस को मिली और जांच शुरू हुई।
पुलिस की कार्रवाई
शुक्रवार को मिली सूचना के बाद, पुलिस ने कोदहरा चौरे पर घेराबंदी की और पाँच पुरुषों तथा दो महिलाओं को गिरफ्तार किया। पूछताछ में अपराधियों ने बताया कि वे उन लोगों को निशाना बनाते थे जिनकी शादी टल रही थी।
- बजरंगी बिंद और बहादुर (उर्फ़ राजू) दुल्हन के भाई का किरदार निभाते थे;
- राजन विश्वकर्मा पिता का, तथा रामबिलास और जय किशन (उर्फ़ अजीत) रिश्तेदार का रोल निभाते थे।
कानूनी पृष्ठभूमि
बजरंगी बिंद के विरुद्ध जौनपुर, देवरिया और आज़मगढ़ में ठगी, धोखाधड़ी और गैंगस्टर अधिनियम के तहत पाँच मुकदमे दर्ज हैं। वहीं जय किशन (अजीत) के खिलाफ जौनपुर और आज़मगढ़ में चार मुकदमे चल रहे हैं।
पुलिस ने इस गिरोह के सभी सदस्यों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है और आगे की जांच जारी है।


