पलामू: जिले के लेस्लीगंज प्रखंड स्थित अखौरी दीदरी गांव में वर्षों से बंद पड़े और जर्जर स्कूल भवन को आधुनिक मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। जिला प्रशासन की पहल और फेयरमाईन कार्बंस प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से तैयार किए गए इस केंद्र का उद्देश्य ग्रामीण बच्चों को बेहतर, सुरक्षित और आकर्षक शुरुआती शिक्षा का वातावरण उपलब्ध कराना है।

इस परियोजना को पलामू के उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत के निर्देश पर पूरा किया गया। भवन के सुदृढ़ीकरण और सौंदर्यीकरण के बाद इसे पूरी तरह बच्चों के अनुकूल बनाया गया है। आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित इस आंगनबाड़ी केंद्र का उद्घाटन जिला समाज कल्याण पदाधिकारी (DSWO) नीता चौहान ने फीता काटकर किया।

उद्घाटन समारोह के दौरान नीता चौहान ने केंद्र में पहुंचे बच्चों का तिलक लगाकर स्वागत किया और उन्हें नए भवन में प्रवेश कराया। इस अवसर पर बच्चों के बीच मिठाई, नमकीन, फल और चॉकलेट भी वितरित किए गए, जिससे कार्यक्रम का माहौल उत्साहपूर्ण रहा।

नीता चौहान ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि जो भवन पहले पूरी तरह जर्जर स्थिति में था, उसे अब आधुनिक स्वरूप देकर बच्चों के लिए सुरक्षित और प्रेरणादायक शिक्षण केंद्र बनाया गया है। उन्होंने बताया कि भवन में फर्श पर टाइल्स बिछाई गई हैं और दीवारों को रंग-बिरंगे चित्रों, हिंदी वर्णमाला, मात्राओं तथा शैक्षणिक सामग्री से सजाया गया है, ताकि बच्चे खेल-खेल में सीख सकें।

उन्होंने अभिभावकों से सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की और केंद्र में बच्चों के लिए स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने हेतु आरओ मशीन लगाने का सुझाव भी दिया।

फेयरमाईन कार्बंस प्राइवेट लिमिटेड के जनसंपर्क पदाधिकारी (PRO) अशोक मिश्रा ने बताया कि कंपनी जिला प्रशासन के साथ मिलकर सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के तहत लगातार विकास कार्यों में योगदान दे रही है। उन्होंने कहा कि कंपनी ने केंद्र में अध्ययन करने वाले सभी बच्चों को यूनिफॉर्म भी उपलब्ध कराई है और भविष्य में भी ऐसे सामाजिक कार्य जारी रहेंगे।

कार्यक्रम में कंपनी के एडमिन अंशु वर्मा, सुपरवाइजर अर्पणा मिश्रा, आंगनबाड़ी सेविका करुणा निधि शुक्ला समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण, अभिभावक और स्थानीय लोग मौजूद रहे। ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे गांव के बच्चों को बेहतर माहौल में प्रारंभिक शिक्षा मिलेगी और शिक्षा के स्तर में सकारात्मक सुधार होगा।

यह पहल केवल एक जर्जर भवन के पुनर्विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी प्रशासन और निजी क्षेत्र के सहयोग से ग्रामीण विकास और बाल शिक्षा को बढ़ावा देने का एक प्रभावी उदाहरण भी बनकर सामने आई है।